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आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा चुने जाने की प्रक्रिया

बौद्ध धर्म के 14 वें गुरु दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो है जिन्हें आध्यात्मिक गुरु भी कहा जाता है । तिब्बत की दलाई लामा की तबीयत अब थोड़ा कम ठीक रहती है ऐसे में अगले दलाई लामा चुने जाने की प्रक्रिया और नए दलाई लामा के चुनाव की चर्चा जोरों पर है । दलाई लामा यानी कि बौद्ध धर्म के 15वें गुरु के चयन को लेकर वर्तमान दलाई लामा ने  अपने एक बयान में कहा था कि उनका उत्तराधिकारी कोई भारतीय भी हो सकता है यानी की अगला दलाई लामा भारत से सुना जा सकता है । वहीं चीन अगले दलाई लामा के चुनाव को अपने अधिकार में रखना चाहता है, जिसका अमेरिका द्वारा विरोध भी हो रहा है ।

चलिए जानते हैं दलाई लामा का चुनाव किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है – जैसा कि सभी को मालूम है कि तेनजिन ग्यात्सो फिलहाल वर्तमान दलाई लामा है और तिब्बत के राष्ट्र अध्यक्ष भी हैं और 14 में आध्यात्मिक गुरु भी हैं जो सभी का मार्गदर्शन करते है । हमेशा से नए दलाई लामा के चुनाव के लिए दलाई लामा अपने जीवनकाल के खत्म होने से पहले कुछ ना कुछ संकेत दे देते हैं और उन्ही संकेतों को आधार मानकर नए दलाई लामा की खोज शुरू हो जाती है । दलाई लामा के शब्दों को सुनते हुए एक ऐसे नवजात का चुनाव किया जाता है और उसे अपना गुरु बनाया जात है । ऐसे नवजात की ख़ोज दलाई लामा की मृत्यु के तुरंत बाद ही शुरू हो जाती है । हमेशा लामा के निधन के आसपास जन्म लिए बच्चे की खोज की जाती है ।

लेकिन कई बार लामा की यह ख़ोज सालो तक भी चलती है और जब तक नये लामा की खोज नहीं जाती है तब तक अस्थाई रूप से कोई स्थाई विद्वान् लामा गुरु का काम सम्हालता है । ऐसा ही हो सकता है मौजूदा लामा  के बताए हुए लक्षण कई बच्चों में देखने को मिले ऐसे में समय आने पर उनके शारीरिक और मानसिक स्तर की कठिन परीक्षा ली जाती है, जिसमें पूर्व लामा के व्यक्तिगत स्तुओ की पहचान को भी शामिल किया जाता है । लेकिन दलाई लामा चुने जाने की परंपरागत प्रक्रिया चीन मनाने से इनकार करता है इसलिए अगले  दलाई लामा का चुनाव किस प्रक्रिया से किया जाएगा यह स्पष्ट नहीं है ।

वही वर्तमान लामा में अपने एक बयान में कहा था कि वे अपने जीवन काल में अपना उत्तराधिकारी चुन सकते हैं या फिर उत्तराधिकारी के चुनाव का काम धर्मगुरुओ को दे सकते है लेकिन यह परंपरा से आलग होगा ।बौध्दधर्म क अनुनायियों के अनुसार वर्तमान लामा पहले के ही लामा के पुर्नजन्म है । मालूम हो की चीन ने 1951 में तिब्बत पर कब्ज़ा कर लिया था और वर्तमान लामा को उसके बाद पद पर बैठाया गया लेकिन उनका चुनाव 1937 में ही कर लिया गया था ।

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