जानते है रॉकेट ऑफ़ वूमेन के बारे में जिन पर थी चंद्रयान २ की अहम जिम्मेदारी

भारत के चंद्रयान 2  मिशन का निर्देशन कर रही थी रितु करिधाल,  और उनके साथ ही एम विनीता को इस प्रोजेक्ट का प्रोजेक्ट डायरेक्टर की भूमिका सौंपी गई थी । इसके पहले भी इसरो कई मौकों पर महिला वैज्ञानिकों को बड़ी जिम्मेदारियां सौंप चुका है । इसरो द्वारा लांच हुए मंगल मिशन में भी 8 महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । रितु करिधल  को  रॉकेट वूमेन ऑफ इंडिया भी कहा जाता है । इसके पहले इन्होंने मार्स आर्बिटर मिशन में डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर रह चुकी है । रितु ने स्पेस इंजीनियरिंग में पढ़ाई की है और 2007 में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने इन्हें साइंटिस्ट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया था ।

रितु भौतिक और गणित में रुचि है और बचपन से ही रितुनासा और इसरो के बारे में अखबारों में छपी जानकारियों को कटिंग करके अपने पास रखटी थी जब रितु पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही थी तभी इसरो में उन्होंने नौकरी के लिए आवेदन किया और स्पेश  साइंटिस्ट बन गई  । रितु 21 वर्षों से इसरो में  एक वैज्ञानिक के रूप में काम कर रही हैं  । एक इंटरव्यू में रितु ने कहा था कि “ ऐसी आम मान्यता है कि पुरुष मंगल ग्रह से आते हैं और महिलाएं शुक्र ग्रह से आते हैं लेकिन मंगल अभियान की सफलता के बाद लोगों ने महिला वैज्ञानिकों के लिए मंगल की महिलाएं कहना शुरू कर दिया और यह सुनकर अच्छा लगता है” ।

चंद्रयान 2 के प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी इसरो की दूसरी महिला वैज्ञानिक एम विनीता को दी गई थी । विनीता के पास डिजाइन इंजीनियरिंग का लंबा अनुभव है और काफी समय से वे सैटलाइट पर काम कर रही है  । विनीता को 2006 में एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी आफ इंडिया द्वारा बेस्ट साइंटिस्ट पुरस्कार से सम्मानित किया था । किसी भी मिशन में प्रोजेक्ट डायरेक्टर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है और प्रोजेक्ट की सफलता की पूरी जिम्मेदारी एक प्रोजेक्ट डारेक्टर पर होती है क्योंकि वह पूरी अभियान का मुखिया होता है । किसी भी अंतरिक्ष मिशन में एक से ज्यादा मिशन डायरेक्टर कई बार होते हैं लेकिन प्रोजेक्ट डायरेक्टर एक ही इंसान को बनाया जाता है और उस प्रोजेक्ट डायरेक्टर के ऊपर ही एक प्रोग्राम डायरेक्टर भी होता है ।

भारत के चंद्रयान 2  मिशन से जुड़े यह दोनों ही महिलाएं ने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है । भले ही चंद्रयान -2 के विक्रम लैंडर से संपर्क टूट जाने की वजह से वैज्ञानिकों में निराशा हुई है लेकिन इसके बावजूद इसरो का कहना है कि उसके हौसले बुलंद है । यही नहीं चंद्रयान -2 के लिए इसरो को तमाम देशों से बधाइयाँ मिल रही हैं और उसकी प्रशंसा की जा रही है । नासा का कहना है कि आने वाले समय में चंद्रयान-2 से महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है ।

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