बार बार पेशाब आये तो हो जाएं सावधान

आजकल किडनी स्टोन की समस्या बढ़ रही है । इसकी वजह है खाने पीने की गलत आदत । इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से भी स्टोन की समस्या हो सकती है । स्टोन इसे आमतौर पर पथरी के नाम से लोग जानते है । स्टोन असल मे किडनी में  एक विशेष प्रकार के साल्ट के जमा हो जाने को कहा जाता है । पहले पहले यह एक छोटे आकार में रहता है और इसके चारों तरफ धीरे धीरे साल्ट जमा होने लगता है । कभी कभी स्टोन सिर्फ एक किडनी में होती है पर यह दोनों किडनी में हो सकती है । सामान्यतया दवा खाने से यह मूत्र के जरिए निकल जाती है लेकिन जब इसका आकार बडा हो जाता है तो यह गंभीर समस्या बन जाती है ।

जब स्टोन का आकार बड़ा हो जाता है तो इसको ऑपरेशन के जरिये निकाला जाता है । यूरोलोजिस्ट एनएस शंकर ने बातचीत में बताया कि असल मे स्टोन की समस्या क्यो होती है और किस प्रकार की सावधानी बरतनी चाहिए । सबसे पहले जानते है इसके लक्षण के बारे में – जब किडनी में स्टोन हो जाता है तो पीठ के एक तरफ या फिर पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द अक्सर होता है और पेसाब करने में जलन होती है या बदबू आती है । बार बार पेसाब लगना या पेसाब का रंग पीला होना भी स्टोन होने का एक लक्षण हो सकता है ।

जब समस्या गम्भीर हो जाती है तो मरीज को जी मचलाने, उल्टी होना, ठंढ लगना, बुखार आना, अधिक पसीना आना थकान होना या फिर रात में बार बार पेसाब आना इसके लक्षण है । ज्यादातर स्टोन की समस्या गलत खान पान की आदतों और कम पानी पीने की वजह से होता है । डॉक्टर के अनुसार जब हमारे शरीर मे कैल्शियम के अवशोषण नही हो पाता है तो यह साल्ट के रूप में जमा होने लग जाता है और यही पथरी बन जाता है । जब प्रोसेस्ड खाने का सेवन अधिक किया जाता है तो भी स्टोन की समस्या उत्पन्न हो सकती है क्योंकि इन खानों में सोडियम की अधिकता होती है ।

ये कैल्शियम का अधिक उत्सर्जन करते है और पेसाब में सोडियम की मात्रा बढ़ने से स्टोन की समस्या हो जाती है । शरीर मे काल्सियम अवशोषित करने की क्षमता अधिक सॉफ्ट ड्रिंक या कैफीन वाले पेय पदार्थों के सेवन से भी प्रभावित होता है । जो लोग एक बार स्टोन की समस्या से जूझ चुके होते है उन्हें दुबारा से ये समस्या होने की समसुंग बनी रहती है । इन लोगो की दूध या दूध के उत्पाद से बने पदार्थों के सेवन से परहेज करना चाहिए साथ ही रेड मीट, पालक, टमाटर,चाय कॉफी, चावल आदि का सेवन कम से कम करना चाहिए ।

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