भारत तैयार करेगा पुरे देश का डिजिटल मैप

जल्द ही भारत का अपना मैप होगा जो की गूगल के मैप से बेहतर होगा । भारत सरकार द्वारा पूरे देश का डिजिटल मैप तैयार कराए जा रहे हैं । भारत के सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा ड्रोन की मदद से देश का मानचित्र डिजिटल ड्रोन की मदद से बनाया जाएगा ।

इस डिजिटल  मैप के बनने के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में बुनियादी ढांचे के विकास की सभी जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी, क्योंकि बदलते वक्त के साथ भारत के बुनियादी ढांचे के विकास करना बहुत जरूरी हो गया है और इसके लिए सटीक मानचित्र होना भी बहुत जरूरी है ।

इसलिए भारत सरकार का सबसे पुराना वैज्ञानिक संस्थान सर्वे ऑफ इंडिया पहली बार ड्रोन की सहायता से पूरे देश का डिजिटल मैप तैयार करने जा रहा है जो कि भारत के कुल क्षेत्र 32 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में से 24 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की ड्रोन के माध्यम से मैपिंग की जाएगी ।

अभी जो मान चित्र इस समय उपलब्ध हैं उनकी वास्तविक और अनुमानित दूरी का अनुपात 10 लाख से 50 लाख तक होता है और इस डिजिटल मानचित्र में अनुपात 1: 500 होगा । जिसका सीधा मतलब है कि इस डिजिटल मानचित्र में 1 सेंटीमीटर की दूरी 500 सेंटीमीटर को को दर्शयेगा ।

डिजिटल मानचित्र में 3डी मानचित्र होंगे । इस चित्र को बनाने में 300 ड्रोन का प्रयोग किया जाएगा और भारत का नया डिजिटल मानचित्र 2 सालों में तैयार हो जाने की उम्मीद है ।

डिजिटल मैपिंग की यह परियोजना नेटवर्क ऑफ कंप्यूटर ऑपरेटेड रिफरेंस स्टेटस (कोर्स) नाम के कंप्यूटर प्रोग्राम पर आधारित है ।

इस प्रोग्राम की खासियत यह है कि यह सेंटीमीटर के पैमाने पर 3डी पोजिशनिंग आंकड़े को उपलब्ध करा सकता है और जब ड्रोन 200 से 300 मीटर की ऊंचाई पर उड़ते हुए जमीन की तस्वीर लेगा तो उस स्थान के सटीक देशांतर और अक्षांश का पता लगाया जा सकेगा ।

इस सर्वेक्षण को करने के लिए देशभर में ढाई हजार नियंत्रण केंद्र बनाए हैं । जिनकी सहायता से देशभर का डिजिटल मानचित्र तैयार किया जाएगा और फिलहाल यह परियोजना तीन राज्य महाराष्ट्र,कर्नाटक और हरियाणा में मैपिंग का कार्य करना शुरू कर दिया है और धीरे-धीरे देश भर के अन्य राज्यों में भी इनका कार्य शुरू हो जाएगा ।

इस परियोजना में नमामि गंगे मिशन को भी शामिल किया गया है और गंगा नदी के दोनों किनारों के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले प्रभावित मैदानी क्षेत्र की गिनती की जाएगी ।

जिससे बाढ़ से निपटने में भी मदद मिलेगी । सरकार इस डिजिटल मानचित्र का प्रयोग करके बेहतर योजनाएं बना सकेगी । डिजिटल मानचित्र को तैयार करने में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में ना पड़े ।

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