अमिताभ बच्चन राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में नहीं हुए शामिल : मिलना था दादासाहेब फालके पुरस्कार

मालूम हो कि अमिताभ बच्चन को इस साल का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई है । लेकिन अमिताभ बच्चन की तबीयत ना सही होने की वजह से वह राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में हिस्सा नहीं ले पाएंगे । यह पुरस्कार आज दिल्ली में दिया गया और अमिताभ बच्चन को बीमार होने की वजह से डॉक्टर ने सफर ना करने के लिए कहा है । इस वजह से अमिताभ बच्चन राष्ट्रीय पुरस्कार का हिस्सा नहीं बन पाए ।

अमिताभ बच्चन का सिनेमा जगत का प्रतिष्ठित पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जाना था लेकिन इस समारोह में अमिताभ बच्चन स्वास्थ्य कारणों से मौजूद नहीं रह सके । इस संदर्भ में अमिताभ बच्चन ने 22 दिसंबर को शाम में एक ट्वीट के माध्यम से यह जानकारी खुद ही दी थी ।

अमिताभ बच्चन के ट्वीट से इस बात की झलक देखने को मिल रही थी कि उन्हें पुरस्कार लेने दिल्ली ना जाने का पछतावा है । अमिताभ बच्चन ने अपने ट्वीट में लिखा है ‘बुखार हो गया है..! यात्रा करने की अनुमति नहीं है..दिल्ली में कल राष्ट्रीय पुरस्कार में शामिल नहीं हो पाऊंगा.. काफी दुर्भाग्यपूर्ण.. मुझे पछतावा है’ । बता दें सिनेमा जगत का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार है ।

66वें राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में अमिताभ बच्चन को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाना है । अमिताभ बच्चन को दादा साहब फाल्के पुरस्कार फिल्म जगत में उनकी अभूतपूर्व योगदान और उत्कृष्ट अभिनय के लिए दिया जा रहा है ।

यह पुरस्कार देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के द्वारा प्रदान किया गया । बता दें इस साल सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार गुजराती फिल्म हेलोन को दिया गया । वही आयुष्मान खुराना को अंधाधुन और विक्की कौशल को उरी द सर्जिकल स्ट्राइक के लिए संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया ।

वहीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार साउथ की मशहूर एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश को दिया गया । अभी कुछ दिनों पहले ही अमिताभ बच्चन अपनी पोती आराध्या बच्चन की परफॉर्मेंस को देखने के लिए उनके स्कूल के वार्षिक समारोह में पहुंचे थे जहां पर आराध्या के दमदार स्पीच को देखकर अमिताभ बच्चन समेत वहां के सभी मेहमान दंग रह गए ।

अमिताभ बच्चन ने अपनी पोती आराध्या की परफारमेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा सबसे गर्वित पल.. और आवाज.. लड़कियों की.. आराध्या की… मेरी और अपनी’ । दादा साहब फाल्के पुरस्कार धुन्दिराज गोविंद फाल्के के नाम पर दिया जाता है इन्हें भारतीय सिनेमा का जनक कहा जाता है ।

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार 1969 से देना प्रारम्भ हुआ था । इस पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण कमल, एक सॉल और दस लाख रुपये नगद दिए जाते है ।

 

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