बिहार के बच्चों में कुपोषण की वजह से बौनापन देखने को मिल रहा

बिहार के बच्चों में कुपोषण की वजह से बौनापन देखने को मिल रहा साथ ही मानसिक विकास भी हो रहा बाधित

बिहार में कुपोषण को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं । बिहार के बच्चों में कुपोषण के कारण बच्चे बौने बन रहे हैं साथ में उनका मानसिक विकास भी अवरुद्ध हो रहा है । रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के 5 साल तक के बच्चे में 48.3 फ़ीसदी तक कुपोषण के शिकार है जिसके कारण वे बौनेपन के शिकार हैं । इनमें बड़ी संख्या उन बच्चों की है जो गर्भ से ही कुपोषित हो जाते हैं और 5 साल की उम्र होते होते वह कुपोषण के साथ बौनेपन के शिकार हो जाते हैं ।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 की रिपार्ट के 38.4 फीसदी के आंकड़े से यह काफी ज्यादा है। अगर यह कहे कि कुपोषण की वजह से बिहार देश का बौना बन जा रहा है तो यह गलत नहीं होगा । राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4के अनुसार भारत में 5 साल से कम उम्र के 29.4 फीसदी बच्चे बौनेपन के शिकार हैं । इसका मतलब यह हुआ कि ऐसे बच्चे जिनकी लंबाई उनकी उम्र तुलना में कम है ।

बिहार में कुपोषण का आंकड़ा पूरे विश्व में सर्वाधिक है । ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट 2018 की मानें तो भारत में सर्वाधिक 4.66 करोड़ बच्चे बौनेपन के शिकार है । पाकिस्तान और नाइजीरिया में यह आंकड़ा 1.07 करोड़ और 1.39करोड़ है । सबसे ज्यादा चौंकाने वाला तथ्य यह है कि भारत में बौनेपन के शिकार बच्चों की संख्या बिहार राज्य में सर्वाधिक है ।

बिहार में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में 48.3 फीसदी बौनेपन देखा गया है । रिपोर्ट के अनुसार बिहार के 38 जिलों में से 23 जिलों में बच्चे कुपोषण के गंभीर स्थिति में हैं । जिसमें बक्सर, नालंदा,कैमूर, नवादा, गया, भोजपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरनगर, शिवान, वैशाली, दरभंगा, मुंगेर,जमुई, किशनगंज, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा और अररिया शामिल है ।

आइए जानते हैं कैसे निर्धारित होता है बौनापन –

बौनेपन का प्रमुख कारण है कुपोषण । जब बच्चों को पर्याप्त भोजन और सही पोषण नहीं मिल पाता है तथा संक्रमण आदि की वजह से बार-बार बीमार पड़ते हैं तो उससे उनकी वृद्धि प्रभावित होती है और बच्चे बौनेपन के शिकार हो जाते हैं । बौनेपन का निर्धारण उम्र की तुलना में लंबाई के आधार पर किया जाता है ।

कुपोषण से बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बाधित होता है और बच्चे कई गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं जिसमें वजन कम होना,गंभीर बीमारियों का शिकार होना, सामान्य बच्चों की तरह मानसिक विकास का ना होना, शारीरिक क्षमता का कम होना तथा सामान्य बच्चों की तरह लंबाई ना बढ़ना, यह सब पोषण की कमी के कारण होता है ।

समाज कल्याण विभाग ने बच्चों में बढ़ते कुपोषण और महिलाओं व किशोरियों में खून की कमी यानी कि एनीमिया जैसी समस्या से निपटने के लिए कई सारी पहल शुरू कर दी है जिसमें सभी जिलों में आंगनवाड़ी केंद्र तथा अस्पतालों में 5 साल तक के बच्चों का नियमित वजन कराया जा रहा है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि उनका वजन ठीक है या नहीं । आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का अभियान भी चलाया जा रहा है ।

डॉक्टर के मुताबिक कुपोषण के कारण बौनापन और कम वजन की समस्या हो जाती है इसका प्रमुख कारण बच्चों के जीवन के प्रारंभिक 1000 दिन के दौरान उनकी देखभाल में कमी होना है । ऐसे में बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के होने का खतरा रहता हैं और उनका मानसिक विकास भी सही तरीके से नहीं हो पाता और ऐसे बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में कोई भी चीज सीखने में पिछड़ जाते है ।

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