भारत मे क्लाइमेट चेंज भी कुपोषण के लिए है जिम्मेदार

भारत मे क्लाइमेट चेंज भी कुपोषण के लिए है जिम्मेदार

भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है । चीन के बाद सबसे ज्यादा जनसंख्या भारत में पाई जाती है । भारत की विकास दर अन्य विकासशील देशों की तुलना में अधिक है । लेकिन ऐसे में कुपोषण की समस्या की वजह से भारत की समस्या बढ़ जाती है । हाल के कुछ वर्षों की बात करें तो भारत में कुपोषण की रोकथाम में थोड़ी प्रगति हुई है लेकिन यहां दर काफी नहीं है और भारत में जलवायु परिवर्तन की वजह से स्थिति और ज्यादा बिगड़ रही है ।

एक तरह से क्लाइमेट चेंज भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुका है । इसकी वजह से भारत में हर साल बाढ़ और सूखा जैसी आपदा आती रहती है । कभी किसी हिस्से में बाढ़ बहुत ज्यादा आती है तो कई हिस्से में सूखा पड़ जाता है ।

इस सबका बुरा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है लेकिन अब इसका असर भारत के लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है क्योंकि बाढ़ और सूखे जैसी आपदाएं जनजीवन को प्रभावित करती है और इसकी वजह से सबसे ज्यादा बच्चों के स्वास्थ्य और विकास पर प्रभाव पड़ता है ।

अभी हाल में ही हुए एक शोध से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से बाढ़ और सूखे की वजह से 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह सबसे बड़ा खतरा बन जाता है और उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है, खास करके बाढ़ से ग्रस्त क्षेत्रों में बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है । आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में 50 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं और यह सीधे तौर से खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है ।

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ न्यूट्रिशन द्वारा भारत के सभी राज्यों के लिए कुपोषण की स्थिति के आंकड़े जारी किए गए हैं ।इस शोध आंकड़े के अनुसार साल 2017 में भारत में जितने बच्चे कम वजन वाले जन्म लिए इन बच्चों की जन्मदर 21.4 फीसदी रही और जिन बच्चों का विकास नहीं हो पा रहा है उनका आंकड़ा 39 30 फीसदी है, वही जल्दी थकने वाले बच्चों की संख्या 15.7  फीसदी, कम वजन वाले बच्चों की संख्या 32.7 फीसदी है । इस रिपोर्ट के अनुसार लगभग 60 फीसदी बच्चे एनीमिया की समस्या से पीड़ित है साथ ही 11.5 फीसदी बच्चे अपने आयु से अधिक वजन के पाए गए ।

इस रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा स्वास्थ्य से प्रभावित बच्चे बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के होते हैं उन्हें और ज्यादा मदद पहुंचाने की जरूरत है, साथ ही महिलाओं और शिशु के स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए । इस शोध के द्वारा पहली बार क्षेत्रीय स्तर पर क्लाइमेट चेंज के डाटा और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों का विश्लेषण शोध में किया गया है और यह जानने का प्रयास हुआ है कि बाढ़ की वजह से बच्चों में कुपोषण के बीच किस प्रकार का संबंध होता है । इस शोध से पता चलता है कि विभिन्न हिस्सों में बारिश का प्रभाव अलग-अलग है और इसका असर भी परिस्थितियों के अनुसार अलग अलग पड़ता है।

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