कृषि विधेयक

आइए जानते हैं कृषि विधेयक के प्रस्ताव के बारे में जिसका हो रहा है विरोध

भाजपा द्वारा साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का चुनावी वादा किया था। अब भाजपा की मोदी सरकार केंद्र में है तो अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में सुधार हेतु लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

अभी इसी सिलसिले में लोकसभा में तीन विधेयक पारित कराए गए हैं। इन विधायकों का विपक्ष के द्वारा लगातार विरोध हो रहा है और देश भर में विरोध प्रदर्शन के जा रहे हैं।

आइए जानते हैं कृषि विधेयक के प्रस्तावों के बारे में जिसका किसानों को क्या लाभ मिलेगा और इसका विरोध किस वजह से हो रहा है –

कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य विधेयक 2020 में जो प्रस्ताव लाया गया है उसके महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं –

  • ऐसी व्यवस्था बनाई जाना जहां पर किसान और व्यापारी राज्यों में स्थित कृषि उत्पाद बाजार समिति से बाहर उत्पादों की खरीद बिक्री आसानी से कर सकें।
  • राज्य के भीतर तथा राज्य के बाहर किसानों को अपने उत्पादों के निर्बाध व्यापार करने को बढ़ावा दिया जाए व्यापार और परिवहन लागतो को कम करने के लिए किसानों को उनके उत्पादों से अधिक मूल दिलाया जाए
  • ई – ट्रेडिंग को और भी ज्यादा सुविधाजनक रूप से विकसित किया जाए

 लेकिन इस विधेयक का निम्नलिखित वजह से विरोध हो रहा है विरोध की वजह इस प्रकार से है –

  • किसान अगर पंजीकृत किसी उत्पाद व्यापार बाजार समिति के बाहर अपने उत्पादों को बेचने लगेंगे तब इससे मंडियों को शुल्क की वसूली नहीं हो पायेगी इससे राज्यों को राजस्व का नुकसान होगा।
  • अगर मंडियों के बाहर कृषि उत्पाद की खरीद बिक्री शुरू हो जाएगी तब राज में स्थित कमीशन एजेंट बेरोजगार हो जाएंगे
  • इस प्रस्ताव से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर आधारित खरीद की प्रणाली समाप्त हो जाएगी
  • ई-नाम जैसे सरकारी ट्रेडिंग पोर्टल का कारोबार मंडियों पर आधारित होता है अगर कारोबार के अभाव में मंडिया बर्बाद हो जाएंगे तब फिर सरकार के इस ई-नाम पोर्टल का क्या काम होगा।
कृषि विधेयक से किसानों को ये लाभ होंगे

इस विधेयक से किसानों को निम्नलिखित प्रकार से लाभ हो सकते हैं जैसे कि

  • किसान अपने उत्पादों को बेचने के लिए सिर्फ मंडी के व्यापारियों तक सीमित नही रहेंगे अगर उन्हें बाहर अपने उत्पादों की अच्छी कीमत मिलेगी तब वह बाहर भी बेंच सकेंगे
  • किसान अपने उत्पादों को मंडियों के अलावा फर्म, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, प्रसंस्करण यूनिट के पास भी बेच सकेंगे और यहां पर व्यापार के ज्यादा अवसर उपलब्ध होंगे
  • इस नए विधेयक से बिचौलियों से छुटकारा मिल जाएगा क्योंकि मंडी और किसानों के बीच बिचौलिए किसानों के हक को एक तरह से मारते हैं और इस नई व्यवस्था से बिचौलियों के लिए कोई भी काम नही होगा।
  • देश में प्रतिस्पर्धी डिजिटल व्यवस्था को इससे बढ़ावा मिलेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।
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इस कृषि विधेयक में निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं जो इस प्रकार से हैं
  • किसानों को अपने उत्पादों को कृषि कारोबार करने वाली कंपनियो, प्रसंस्करण इकाई, थोक विक्रेता और निर्यातकों से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा।
  • कृषि उत्पादों को पूर्व में ही दाम तय करके व्यापारियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट करने की सुविधा भी मिलेगी।
  • 5 हेक्टेयर से कम भूमि वाले सीमांत और छोटे किसानों को व अनुबंधित कृषि करने वालों को लाभ होगा। (बता दें कि देश में करीब 86 फीसदी किसानों के पास 5 हेक्टेयर से भी कम जमीन उपलब्ध है)
  • बाजार की अनिश्चितता के खतरे का नुकसान भी किसानों को नही उठाना पड़ेगा और आधुनिक प्रौद्योगिकी तक किसानों की पहुंच बढ़ सकेगी।
  • विपणन की लागत का होने से किसानों की आय बढ़ेगी और किसी भी तरह के विवादों का निपटारा 30 दिन के भीतर करने की व्यवस्था की गई है।

 कृषि विधेयक के विरोध की वजह  :-

इस प्रस्ताव के विरोध में कहा जा रहा है कि इससे अनुबंधित कृषि समझौते में किसानों का पक्ष कमजोर हो जाएगा और वो अपनी जरूरत के अनुसार मोल भाव नही कर पाएंगे।

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प्रायोजक छोटे और सीमांत किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए हो सकता है इनसे बड़ी कंपनियां खरीदारी में परहेज करें क्योंकि ऐसे किसानों के लिए उन्हें एक बड़ा तंत्र विकसित करना पड़ेगा।

बड़ी कंपनियां निर्यातक और थोक विक्रेता विवादों का लाभ लेना चाहेगी। इससे किसानों को लाभ के बजाय नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इस विधेयक का इस बात को लेकर भी विरोध हो रहा है कि इस कानून से कृषि क्षेत्र में भी पूंजीपतियों के हाथ में जा सकता है और इससे किसानों को लाभ होने के बजाय नुकसान झेलने पड़ेंगे!

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