विश्वगीताप्रतिष्ठानम् का ऑनलाइन गीता स्वाध्याय

विश्वगीताप्रतिष्ठानम् का ऑनलाइन गीता स्वाध्याय

विश्वगीताप्रतिष्ठानम् का ऑनलाइन गीता स्वाध्याय

कोरोना दिशा निर्देशों का पालन करते हुए विश्व हिता प्रतिष्ठानों छिंदवाड़ा का ऑनलाइन सामूहिक गीता स्वाध्याय आयोजित हुआ। जिसमें छिंदवाड़ा के अतिरिक्त सिवनी,मंडला और नरसिंहपुर के गीताप्रेमी सम्मिलित हुए।

विशेष आमंत्रित अतिथियों में केशव प्रसाद तिवारी, पूर्व न्यायाधीश व केंद्रीय उपाध्यक्ष, स्वामी नागेंद्र ब्रह्मचारी, अनगढ़ हनुमान मंदिर, डॉ शरद नारायण खरे मंडला,डा. डी.पी. नामदेव एवं आचार्य जानकी वल्लभ मिश्र सिवनी प्रमुख रूप से उल्लेखनीय है।

पाठ विधि के अनुसार शंखनाद के उपरांत ओम म्यूजिकल ग्रुप के बाल कलाकारों स्वस्तिक, ओम एवं शिवम द्वारा महामंत्र संकीर्तन व वाद्ययंत्रों का वादन करते हुए संकल्प गीत की भव्य प्रस्तुति की गई। ईश्वर शर्मा द्वारा संगीतमय दीप स्तुति, गणेश गौरी वंदना, मानसिक पूजन, सरस्वती वंदना की प्रस्तुति हुई।

संजय शर्मा द्वारा गुरु वंदनाऔर स्वाध्याय महिमा का गायन किया गया। शशिप्रभा अग्रवाल ने सुभाषित, शंकर लाल साहू ने अमृत वचन, पंढरीनाथ दारोकरने गीताSमृतगानं व गीता माहात्म्य प्रस्तुत किया।

आचार्य भगवत व्यास एवं घन श्याम दुबे ने विश्वरूप दर्शन योग नामक अध्याय 11 के श्लोक 18से34 का सस्वर आदर्श वाचन एवं सभी उपस्थित गीता प्रेमियों, विद्वत् जनों द्वारा श्लोकों का अनु गायन किया गया।

व्यक्तिशः श्लोक वाचन के अंतर्गत घनश्याम दुबे ,अजय सिंह वर्मा ,गजानंद चौरे, सुमन लता अग्रवाल, निर्मला घोरसे , रंजन कुमार साहू, गिरवर सिंह गौतम, प्रमोद नारद, दिनेश अग्रवाल, देवेंद्र चौरसिया आदि सभी उपस्थित स्वाध्यायी जनों नें 1-1 श्लोक और उनके अर्थ का वाचन किया।

केशव प्रसाद तिवारी ने अर्जुन के द्वारा किए गए भगवान कृष्ण के अद्भुत ,अदृश्य पूर्व, अनंत ,आश्चर्य मय विश्वरूप के साक्षात् दर्शन का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत किया।

भगवान के विराट स्वरूप को 11 रूद्र ,12 आदित्य ,आठ वसु, साध्य गण, विश्वे देव, अश्विनी कुमार, मरुद् गण, पितरों के समुदाय, गंधर्व,यक्ष, राक्षस, और सिद्धों के समुदाय सभी आश्चर्य से देखते हैं।

जैसे नदियों के जल प्रवाह स्वाभाविक रूप से समुद्र में ही प्रवेश करते हैं वैसे ही नर लोक के वीर भगवान के प्रज्वलित मुंह में प्रवेश करते हैं। नेमीचंद व्योम ने कहा कि भगवान का महाकाल स्वरूप समस्त लोकों का विनाश करने के लिए प्रवृत्त हुआ है।

भगवान ने कहा हे अर्जुन! सभी शत्रु तुम्हारे युद्ध ना करने पर भी मेरे द्वारा पहले ही मारे जा चुके हैं,अतः तुम निमित्त मात्र बन जाओ। उठकर युद्ध करो, शत्रुओं को मारो ,तुम्हारी विजय अवश्य होगी।

आरती, मंत्र पुष्पांजलि, जय घोष व कल्याण मंत्र के साथ स्वाध्याय संपन्न हुआ।

नेमीचन्द व्योम
विश्वगीताप्रतिष्ठानम् छिंदवाड़ा

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