क्या वैश्वीकरण के चलती ही कोरोना वायरस इतना भयावह हुआ

क्या वैश्वीकरण के चलती ही कोरोना वायरस इतना भयावह हुआ ?

अभी तक यह सोचा जाता था कि वैश्वीकरण की वजह से सारी दुनिया का आपस में मेल मिलाप होता है जिससे सब लोग मिलकर हर मुश्किल से लड़ सकते है । वैश्वीकरण के जरिए गरीबी से बाहर निकला जा सकता है, रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सकती है, दवाइयों की खोज और नौकरी में भी अवसर मिलते हैं ।

वैश्वीकरण का ही नतीजा है कि भारत समेत दुनिया के कई सारे विकासशील देशों ने काफी तरक्की की है । वैश्विकरण के बदौलत ही विचारों, औद्योगिक और कौशल ज्ञान, वस्तुओं तथा सेवाओं का एक देश से दूसरे देश में आदान-प्रदान होता है । लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और यही वैश्वीकरण के साथ भी है ।

वैश्वीकरण का दूसरा पहलू काफी डराने वाला है क्योंकि वैश्वीकरण ई वजह से उससे होने वाली समस्या का उचित प्रबंधन न होने कस ही नतीजा कई सारी महामारी है । इससे दुनिया भर में फैली महामारी कोरोना वायरस भी शामिल है । चीन वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अच्छी चीजों के साथ कई सारी बुरी चीजों को भी फैलाया है ।

अब हम कुरौना वायरस को ही ले लेते हैं कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर में तेजी से फैला उसके बाद अगर भारत की बात करे तो भारत में कोरोना वायरस मुंबई में तेजी से फैला क्योंकि मुंबई में हवाई अड्डे हैं और कुछ ही दिनों में इसको पूरे भारत में देखने लगा । भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम देशों में यह वायरस काफी तेजी से फैला है।

यही नहीं 2008 में आयी आर्थिक संकट भी वैश्विकरण का ही नतीजा रहा है   वैश्वीकरण के चलते लोग एक जगह से दूसरी जगह जा रहे और विकास के चलते अनचाहे परिणाम भी भुगतने हैं जिसमें जलवायु परिवर्तन और भूमंडलीकरण को देख सकते हैं । लेकिन इसका जवाब डी ग्लोबलाइजेशन करना नहीं हो सकता ।

वैश्वीकरण के चलते जलवायु परिवर्तन, दुनिया भर में देखे जा रहे हैं । वैश्वीकरण में राजनीतिक वैश्वीकरण और व्यक्तिक वैश्वीकरण का होना बेहद जरूरी है लेकिन यह गायब है । स्वास्थ्य एजेंसी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही हैं लेकिन दुनिया भर की सरकार उतना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रही है ।

कोरोना वायरस महामारी खत्म होने के बाद चीन भारत जैसे देश तेजी से वृद्धि करेंगे और अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी भले ही कई स्थानों पर धीमी वृद्धि हो और हो सकता है आने वाले समय में विनिर्माण व्यापार में कमी आए और सेवाओं के व्यापार में बढ़ोतरी देखने को मिले और इसका लाभ एशियाई देशों को मिलेगा ।

अब वक्त की जरूरत है कि वैश्वीकरण से होने वाले जोखिम का प्रबंधन बेहतर नीतियां बनाकर किया जाए और अनचाही स्थिति उत्पन्न होने के लिए भी तैयार रहना चाहिए जिससे आने वाले भविष्य में किसी भी तरह के संक्रामक बीमारियां इतना भयावह रूप धारण न करे कि वे महामारी बने ।

वक्त की जरूरत है कि अब हम अपनी निगरानी तंत्र को मजबूत करे तथा स्वास्थ्य प्रणाली में ज्यादा निवेश किया जाए । साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में ज्यादा रिसर्च की जरूरत है । जरूरत है वक्त के साथ व्यवहार में भी बदलाव लाया जाए जिससे तमाम तरह के संक्रामक रोगों के खतरों को कम किया जा सके । लोगों को जागरूक किया जा सके तथा भविष्य में होने वाली बीमारी से बचा जा सके, साथ ही जलवायु परिवर्तन के जोखिमों का भी प्रबंधन करने का प्रयास करना चाहिए ।

 

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