कल्पना चावला : जिन्होंने अंतरिक्ष में भारत का नाम रोशन किया था

एक वक्त जब महिलाओं को चारदीवारी के अंदर ही रहना पड़ता था । उन्हें बाहर आने जाने की इजाजत नहीं थी । लेकिन वक्त बदलता गया और वक्त बदलने के साथ अभिभावकों की सोच बदली और आज तो इंटरनेट के समय में लड़कियां अंतरिक्ष में भी पहुंच चुकी हैं ।

आज बात करते हैं अंतरिक्ष में जाने वाली भारत की पहली महिला के बारे में, जिन्होंने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का नाम रोशन किया था । अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला का नाम कल्पना चावला  था । कल्पना चावला अंतरिक्ष की यात्रा पर जाने वाली दूसरी भारतीय थी ।

कल्पना चावला से पहले भारत के राकेश शर्मा 1984 में सोवियत संघ अंतरिक्ष यान से अंतरिक्ष में गए थे । कल्पना चावला भारतीय महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं ।

कहा जाता है कि कल्पना चावला  जब आठवीं कक्षा में थी तब उन्होंने अपने पिता से अपने इंजीनियर बनने की इच्छा को बताया था । कल्पना चावला के पिता चाहते थे कि कल्पना एक डॉक्टर या फिर टीचर बने ।

कल्पना चावला ने महज 35 साल की उम्र में पृथ्वी की परिक्रमा लगाई और देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर दिया । कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था ।

कल्पना चावला अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थी । बचपन में कल्पना चावला  को मोटू के नाम से बुलाया जाता था ।

कल्पना चावला अपने नाम कल्पना के अनुरूप ही दुनिया दिखा दिया कि यदि आसमान में जाने की कल्पना कर रहे हो तो वहां जाने के लिए पूरा प्रयास करो । कल्पना चावला एक कदम आगे बढ़ गई और अपने सपने के साथ ही मर कर अमर हो गई ।

कल्पना चावला  ने 19 नवंबर 1997 को अपना पहला अंतरिक्ष मिशन की शुरुआत की थी । उस समय कल्पना चावला की उम्र महज 35 साल की थी । कल्पना चावला ने अन्य साथी अंतरिक्ष यात्री के साथ स्पेस शटल कोलंबिया STS -87 से उड़ान भरी थी ।

कल्पना चावला ने अपने पहले अंतरिक्ष मिशन के दौरान 1.04 करोड़ मील का सफर तय किया था और करीब 372 घंटे अंतरिक्ष में बिताए थे । कल्पना चावला की प्राथमिक शिक्षा करनाल के टैगोर बाल निकेतन में हुई थी ।

हरियाणा के पारंपरिक समाज में कल्पना चावला जैसे लड़की ने अपना सपना पूरा किया था । कल्पना चावला ने अपने सपने को पूरा करने के लिए चंडीगढ़ पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की । भारत उस समय अंतरिक्ष के क्षेत्र में काफी पीछे था ।

कल्पना चावला  को अपना सपना पूरा करने के लिए नासा जाना जरूरी था और कल्पना चावला 1982 में अमेरिका चली गई और टेक्सास यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियर में एम टेक किया । उसके बाद यूनिवर्सिटी कोलोराडो से अपनी  डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की ।

कल्पना चावला ने 1988 में नासा को ज्वाइन किया था । कल्पना चावला की नियुक्त नासा के रिसर्च सेंटर में हुई थी और इसके बाद 1995 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल कर ली गई । 8 महीने के प्रशिक्षण के बाद कल्पना चावला ने 19 नवंबर 1997 को अपना पहला अंतरिक्ष यात्रा पर गई ।

उस समय भारत समेत पूरी दुनिया ने कल्पना चावला और उनकी टीम को शुभकामनाएं देकर अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना किया था । वही अंतरिक्ष इतिहास में 1 फरवरी 2013 को सबसे मनहूस दिन माना जाता है ।

क्योंकि 1 फरवरी 2003 को कल्पना चावला  अपने अन्य साथियों के साथ अंतरिक्ष से धरती पर लौट रही थी ।

कल्पना चावला  अंतरिक्ष शटल STS -107 पृथ्वी से करीब दो लाख फीट की ऊँचाई पर था और अगले 16 मिनट में उनका आंतरिक यान  टैक्सस शहर में उतरने वाला था । भारत समेत पूरी दुनिया उनके अंतरिक्ष यान के धरती पर लौटने का इंतजार कर रही थी ।

लेकिन तभी एक बुरी खबर मिली कि कल्पना चावला के अंतरिक्ष यान का नासा से संपर्क टूट गया है । लोग कुछ समझ पाते इसके पहले ही कल्पना चावला का अंतरिक्ष यान का  मालवा टेक्सास के हैलस इलाके में लगभग 160 किलोमीटर क्षेत्र में फैल गया ।

इस हादसे में सभी अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई । कल्पना चावला ने एमटेक की पढ़ाई के दौरान अमेरिका में शादी कर ली थी और उन्हें 1991 में अमेरिका की नागरिकता भी मिल रही थी ।

लेकिन इसके बावजूद कल्पना चावला का संबंध भारत से हमेशा बना रहा । भारत से जुड़ी होने की वजह से भारत की लड़कियाँ कल्पना चावला  को अपना आदर्श मानती हैं ।

साल 2000 में  कल्पना चावला को दूसरे अंतरिक्ष मिशन के लिए चुना गया था और कल्पना चावला का यह दूसरा अंतरिक्ष मिशन उनकी जिंदगी का आखरी मिशन साबित हुआ।

इस मिशन की शुरुआत से ही तकनीकी गड़बड़ी देखने को मिली थी जिस वजह से  अंतरिक्ष यान की उड़ान में विलंब हुआ था और 16 जनवरी 2003 को कल्पना चावला  अपने 6 अन्य साथियों के साथ उड़ान भरी । 14 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद वह अपने साथियों के साथ 1 फरवरी 2003 को धरती पर लौट रही थी ।

लेकिन अंतरिक्ष यान धरती की कक्षा में प्रवेश करने से पहले ही हादसे का शिकार हो गया । वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे ही कोलंबिया ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया अंतरिक्ष यान में लगी तापरोधी परते उखड़ गई और तापमान बढ़ने की वजह से हादसा हो गया और अंतरिक्ष यान में मौजूद सभी अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई । यह खबर सुनते भारत, अमेरिका और देशों के लोग दुखी हो गए ।

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