14 फरवरी को राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर जानते हैं भारत क्यो है अंगदान में पीछे

14 फरवरी को राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर जानते हैं भारत क्यो है अंगदान में पीछे

भारत में राष्ट्रीय अंगदान दिवस हर साल 14 फरवरी को मनाया जाता है । अंगदान दिवस लोगो को अंगदान करने के लिए जागरूक करने के लिए मनाया जाता है । अंगदान के द्वारा हर साल लाखों लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है और जिन लोगों को दिखाई नहीं देता उनकी आंखों को रोशनी भी दी जा सकती है ।

आमतौर पर शरीर के पांच अंग दान किए जा सकते हैं – अंग, टिशूज, बोन मैरो, प्लेटलेट्स और ब्लड । ब्लड यानी रक्तदान के लिए लोग फिर भी तैयार हो जाते हैं लेकिन भारत में अंगदान की स्थिति इतनी अच्छी नहीं है ।

दूसरे देशों की तुलना में भारत के लोग अंगदान के लिए बहुत कम तैयार होते हैं । एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में स्पेन में 4818 अंग प्रत्यारोपित किए गए जिससे हम यह कह सकते हैं कि स्पेन में हर 10 लाख लोगों में से 93.4 लोग अपने अंग को दान कर देते हैं ।

अमेरिका में दस लाख में 26 लोग और यूनाइटेड स्टेट्स में 20 लोग अंगदान करते हैं । आज भी स्पेन अंगदान के मामले में टॉप पर बना हुआ है । स्पेन में इसके लिए ऑप्ट आउट सिस्टम अपनाया जाता है जिसके तहत सभी नागरिक जन्म से ही अपने आप अंगदान करने के लिए पंजीकृत हो जाते हैं ।

अगर हम बात करें भारत में अंगदान की तो यह आंकड़ा बेहद खराब है और भारत में प्रतीक्षा सूची की वजह से हजारों लोग हर साल मर जाते हैं । भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में हर साल एक से दो लाख के बीच किडनी के अंगदान करने की आवश्यकता होती है ।

लेकिन लगभग पांच ही प्रत्यारोपित हो पाते हैं जिसमें से अधिकांश डोनर कैवेडर डोनर यानी मृत डोनर होते है । जनरल ऑफ मेडिकल साइंस में एक शोध प्रकाशित हुआ था जिसके अनुसार भारत में हर साल प्रति एक मिलियन की आबादी पर 20 लीवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है लेकिन भारत में 2013 और 2014 में कुल 2600 लिवर ट्रांसप्लांट किए गए थे ।

भारत में अंगदान के स्थिति बेहद खराब है और ऐसे में अंगदान कार्यक्रम एक बड़ी चुनौती है । भारत में जीवित लोग जो सीधे तौर से मरीज से संबंधित होते हैं या फिर अपने अंग की अदला बदली करते हैं उनकी संख्या अधिक है ।

मस्तिष्क मृत, सामाजिक संस्कृत कारकों, धार्मिक विश्वासों और अपर्याप्त प्रत्यारोपण केंद्रों सहित लोगों में जागरूकता की कमी से अंगदान का कार्यक्रम भारत में एक चुनौतीपूर्ण काम है । भारत में ब्रान डेड के बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है क्योंकि इससे दूसरों को जीवन प्रदान किया जा सकता है ।

एक अंग दान देने वाला व्यक्ति एक दिल, दो फेफड़े, एकपेनक्रियाज, दो किडनी और अंत दान करके 8 लोगों को जिंदगी दे सकता है । भारत में इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि क्या पश्चिमी देशों की तरह हमारे यहां भी आपको आउटसिस्टम को लागू किया जाना चाहिए जिसमे जन्म से ही वो अंगदान के लिए पंजीकृत हो जाये ।

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