कोरोना वायरस महामारी के दौर में तनाव से बचने के लिए करें खूब गपशप

कोरोना वायरस महामारी के दौर में

कोरोना वायरस महामारी के दौर में

कोरोना वायरस महामारी के दौर में अब देखने को मिल रहा है कि लोगों की जिंदगी में तनाव काफी बढ़ रहा है। लोग सुबह से लेकर रात तक तनाव भरी जिंदगी में जी रहे हैं। हर किसी को कोई न कोई टेंशन है जिसका असर उनके व्यवहार के साथ ही उनके काम पर भी पड़ता है और इससे कुछ नया करने और कुछ नया सोचने की शक्ति कम होती जा रही है।

तमाम लोग इस महामारी के दौर में मनोचिकित्सक के पास जा रहे हैं। कोरोना वायरस महामारी में तनाव से बचने का एक बेहतर तरीका है की खूब सारी गपशप की जाए, मतलब की दिल खोलकर खूब सारी बातें की जाए, इससे काफी राहत मिलती है।

केस 1 :-

एक निजी कंपनी में मैनेजर के पद पर काम करने वाले एक व्यक्ति के व्यवहार में काफी बदलाव देखने को मिला। उसे छोटी-छोटी बातों पर बेहद गुस्सा आने लगा। इसके बाद वह मनोचिकित्सक के पास गया और उसकी काउंसलिंग की गई अब उसकी व्यवहार में सुधार देखने को मिल रहा है।

केस 2 :-

कोरोना वायरस महामारी के चलते दुनियाभर में लॉकडाउन किया गया लॉक डॉउन की वजह से दुकान बंद रहने लगी। नतीजा यह हुआ कि ग्राहक न आने की वजह से कारोबारी काफी तनाव में रहने लगे और बात-बात पर अपनो पर ही गुस्सा करने लगे।

उनके व्यवस्था में काफी ज्यादा बदलाव आने लगा। उनके स्वजनों ने मनोचिकित्सक से परामर्श किया। मनोचिकित्सक ने परिजनों को सलाह दी है कि उनसे खूब सारी बातें की जाए।

इस कोरोना वायरस महामारी के दौर में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के प्रमुख अधीक्षक डॉ दिनेश राठौर का कहना है कि पहले की तुलना में लोग कोरोना वायरस महामारी के द्वार में ज्यादा परेशान रहने लगे।

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उन्हें बीमारी होने के साथ-साथ अपनी नौकरी जाने और व्यापार ठप हो जाने की चिंता सताने लग गई है, जिसकी वजह से उनकी जिंदगी में अत्यधिक तनाव आ गया है। वे गुमसुम रहने लगे हैं और लोगों से बातचीत करना बेहद कम कर दिए हैं।

अक्सर होता है कि जब इंसान परेशान होता है तब वह किसी से बात नही करना चाहता लेकिन इससे समस्या और भी ज्यादा बढ़ती जाती है। इसलिए तनाव मुक्त रहने के लिए जरूरी है कि अपनी समस्याओं को दूसरों से साझा किया जाये।

इसलिए अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ खूब सारी गपशप करना चाहिए। कारोबारी अपना व्यापार बढ़ाने के लिए अपने दोस्तों और परिजनों से इस बारे में विचार विमर्श कर सकते हैं।

इससे उन्हें नया आईडिया आ सकता है और कुछ समय बाद उसके अच्छे परिणाम भी नजर आने लगेंगे, साथ ही इंसान तनाव मुक्त भी रह सकेगा।

मनोचिकित्सक का कहना है कि दोस्तों और स्वजनों से गपशप करने से न्यूरोट्रांसमीटर डोपामाइन का स्तर बढ़ा देता है और इससे अच्छा महसूस होता है और तनाव दूर हो जाता है, नए नए आइडियाज आने लगते हैं। इसलिए अपनी व्यस्त जिंदगी में अपने स्वजनों और दोस्तों को वक्त देना चाहिए और उनसे खूब सारी गपशप करनी चाहिए।

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मनोचिकित्सक का कहना है कि इस कोरोना वायरस महामारी के दौर में यह जरूरी है कि परिवार के किसी भी सदस्य के व्यवहार में अगर बदलाव नजर आने लगे तब बाकी लोगो को चाहिए कि उससे बात करना बंद न करें बल्कि उसका ज्यादा ध्यान रखें और उसे कभी भी अकेला न छोड़ें।

कोशिश करें कि उसके मन में क्या चल रहा है यह जाने और उसकी समस्याओं को सुलझाएं। अगर समस्या  फुरन्त नह सुलझायजी जा सकती तो भी उसके बारे में बात की जा सकती है। इससे नए आइडिया मिलेंगे जिससे समस्या को सुलझाया जा सके और इससे तनाव भी कम होता है।