भारत और चीन के बीच आने वाले भविष्य में छिड़ेगी वर्चस्व की जंग !

भारत और चीन के बीच आने वाले भविष्य में छिड़ेगी वर्चस्व की जंग !

कोरोना वायरस का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है । अभी अब यह सवाल उठता है कि कोरोना वायरस से उबरने के बाद दुनिया किस हालात में होंगी । कयास लगाए जा रहे हैं कि कोरोना वायरस से निजात पाने के बाद एक बार फिर से भारत और चीन के बीच अपने वर्चस्व को लेकर प्रतिद्वंद्विता की भावना भड़क जाएगी क्योंकि चीन भारत का पड़ोसी देश है और सामान्य इंसान में भी यह यही फितरत होती है कि हर पड़ोसी एक दूसरे से सीख लेकर उससे आगे बढ़ने के लिए हर संभव कोशिश करता है ।

अगर कुछ अपवाद को छोड़ दिया जाए तो शायद पड़ोसियों के एक दूसरे से निकलने की प्रतिद्वंद्विता की भावना की वजह से वो जीवन में काफी आगे बढ़ते हैं और समृद्धि हासिल कर पाते हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत और चीन के साथ भी कुछ ऐसा होने वाला है ।

जैसा कि सब को मालूम ही है कि 15वीं शताब्दी से लेकर 19 वीं शताब्दी तक भारत ब्रिटेन का उपनिवेश रह चुका है और भारत 21वीं शताब्दी में दुनिया में सबसे तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रही है । भले ही समग्र रूप में चीन भारत से आगे हैं लेकिन कोरोना वायरस की वजह से चीन की रफ्तार में ब्रेक लग गया है और ऐसे में सबकी निगाह भारत की तरफ है ।

एक बार फिर से दोनों पड़ोसियों के बीच वर्चस्व को लेकर प्रतिद्वंद्विता शुरू हो सकते हैं । मालूम हो कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अगर हिस्सेदारी की बात करें तो चीन के बाद दूसरा स्थान भारत का आता है। वही पहले के मसय में टेक्सटाइल, मसाले, आम आदि को बेचकर यह देश सोना और चांदी खरीद कर अपने व्यापार को संतुलन में रखने की कोशिश करते थे ।

चीन ने सबसे पहले समुद्री कारोबार पुर्तगालियों के साथ शुरू किया था । उसके बाद अन्य दूसरे यूरोपीय देशों ने उसका अनुसरण करना शुरू कर दिया । अगर बीसवीं शताब्दी की बात करे तो वैश्विक आय में 1913 में भारत के हिस्सेदारी मात्र 7.6 फीसदी थी और आजादी के बाद 1952 में यह घटकर 3.8 फीसदी ही रह गई । लेकिन उसके बाद भारत में उदारीकरण की शुरुआत 1991 में शुरू की गई तो उसका नतीजा यह रहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने लगी और 2005 में भारतीय अर्थव्यवस्था 3810.6 डॉलर तक पहुंच गई और वैश्विक आय में भारत की हिस्सेदारी 6.3 प्रतिशत रही है ।

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भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की 5 वी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में जानी जाती है । लेकिन अगर चीन से तुलना करें तो चीन अमेरिका के बाद दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक आय में इसकी हिस्सेदारी 16 फीसदी है । लेकिन कोरोना वायरस की वजह से चीन की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है । इसकी वजह से भारत के लिए आगे निकलने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ गई है । देखते हैं भारत कितना इस अवसर का फायदा उठा पाता है ।

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