वायरस की हो सकेगी अब जल्दी पहचान

वायरस की हो सकेगी अब जल्दी पहचान और चिकित्सा में मिलेगी मदद

अभी तक किसी ने संक्रमण का पता लगाने के लिए कम से कम एक दिन का समय लग जाता है । लेकिन शोधकर्ताओं ने एक ऐसी डिवाइस बनाई है जो वायरस के विभिन्न रूपो के विकास पर काम करके उनका तेजी से पता लगा सकती है । यह डिवाइस इतनी हल्की है कि इसे हाथ में पकड़ कर कहीं भी ले आया और ले जाया जा सकता है । इस डिवाइस को बनाने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि इस डिवाइस की सहायता से वायरस का संक्रमण आसानी से फैलने से रोका जा सकेगा ।

पेन स्टेट यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ता टेरेनोस का कहना है कि “हमने एक किफायती डिवाइस बनाई है जो वायरस को उसके आकार के आधार पर पहचान कर सकती है । यह डिवाइस नैनोट्यूब्स का उपयोग करके बनाई गई है । नैनोट्यूब में वायरस की एक विस्तृत श्रृंखला जैसे दिखती है “। शोधकर्ताओं का कहना है कि वायरस की पहचान के लिए हमने इसमें रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी का भी उपयोग किया है ।

इस तकनीक का प्रयोग संक्रमण का पता लगाने में आसानी से किया जा सकेगा । इसकी सहायता से संक्रमित का पता मिनटों में लगाया जा सकता है ।शोधकर्ताओं ने अपनी इस विशेष डिवाइस को विररियोन नाम दिया है । शोधकर्ताओं का मानना है कि इस डिवाइस का उपयोग बड़े स्तर पर किया जा सकता है जैसे कि इस डिवाइस की मदद से किसानों को फसल की बुवाई के बाद समय रहते खेत में पहले वायरस का पता लगाया जा सकता है, पशुधन में भी वायरस का संक्रमण होने पर बड़े झुंड को इसकी चपेट से बचाया जा सकता है ।

एझ डिवाइस की सहायता से किसी भी वायरस का संक्रमण बस कुछ ही मिनटों में पता लगाया जा सकता है जबकि अभी तक किसी भी संक्रमण का पता लगाने में कम से कम एक दिन का समय लग जाता है ।

यह शोध द प्रेसिडेंट ऑफ द नेशनल अकैडमी आफ साइंस में प्रकाशित किया गया । जिसमें यह कहा गया है कि इस डिवाइस के छोटे आकार और किफायती होने की वजह से इसका महत्व बढ़ जाता है क्योंकि कई बार डॉक्टर के लिए  हर मशीन को ऑफिस में लगाए रहना संभव नहीं हो पाता साथ ही दूरदराज के इलाकों में संक्रमण फैलने पर भारी भरकम मशीनों को वहां ले जाना मुमकिन नहीं होता है ।

ऐसे में यह डिवाइस काफी मददगार साबित हो सकती है । क्रोनस के अनुसार अभी तक वायरस का पता लगाने के लिए जिन तकनीक का उपयोग किया जाता है वह काफी महंगी है ऐसे में यह नया डिवाइस लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प बन जाएगा ।

इस डिवाइस को बनाने वाले शोधकर्ता का कहना है कि इसकी गुणवत्ता में प्रभावी बनाने के लिए इस डिवाइस में सोने के नैनो पार्टिकल्स में लगाए हैं साथ ही कम वायरस की मौजूदगी पर भी हम इसका आसानी से पता लगा सकते हैं । शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग विधि के जरिए एक लाइब्रेरी बनाई जिसमें अलग-अलग प्रकार के वायरस रखे गए ।

मालूम हो कि बीते कुछ दशकों में H1 N1, जीका वायरस,  इबोला वायरस के कारण कई लोगों की मौत हो गई थी क्योंकि समय रहते संक्रमण का पता नहीं लग पाया था । विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यदि वायरस का पता जल्दी लगा लिया जाता तो इन बीमारियों से लोगो को बचा जा सकता था और इसे काफी कम किया जा सकता था ।

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