विश्व शौचालय दिवस : जानते हैं इसका इतिहास और महत्वपूर्ण बाते

19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता है । संयुक्त राष्ट्र संघ ने 19 नवंबर को शौचालय दिवस मनाने की घोषणा की थी । संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर के करीब ढाई अरब आबादी को आज भी शौचालय उपलब्ध नहीं है और लोग गंदगी में रह रहे हैं ।

संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर के करीब 1 अरब आबादी आज भी खुले में शौच करती है और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक अरब आबादी में से आधी आबादी सिर्फ भारत में निवास करती है ।

महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता से ज्यादा स्वच्छता को महत्व दिया था । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि प्रत्येक व्यक्ति को खुद की साफ सफाई का विशेष ध्यान देना चाहिए । ऐसा करने से पूरा देश एक दिन अपने आप स्वच्छ हो जाएगा ।

वक्त बदलने के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ी और लोग शौचालय के महत्व को समझने लगे । भारत में पिछले चार-पांच सालों में भारत सरकार द्वारा शौचालय की उपयोगिता और उसके महत्व को लेकर लोगों के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया था जिससे भारत के दूरदराज के इलाकों में भी शौचालय की स्थिति को लेकर काफी बदलाव देखने को मिला है ।

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व शौचालय दिवस की शुरुआत 2001 में हुई थी । लेकिन लोगों में शौचालय को लेकर जागरूकता लगभग 12 साल बाद आनी शुरू हुई ।

विश्व शौचालय संगठन द्वारा साल 2013 से इस संबंध में काम करने में तेजी आई और साल 2014 से भारत सरकार के प्रयासों से भारत मे स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत की स्वतंत्रता आंदोलन के साथ साथ कई तरह के सामाजिक जागरूकता की अभियान भी चलाए थे ।

गांधी जी ने स्वच्छता को लेकर भी उस समय जोर दिया था और इसमें साफ-सफाई से लेकर शौचालय पर भी जोर दिया गया था । भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सफाई को लेकर हमेशा जागरूक रहते हैं । प्रधानमंत्री की “मन की बात” में अक्सर सफाई से जुड़ी बातें सुनने को मिलती है ।

स्वच्छ भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक सबसे महत्वपूर्ण अभियान है । एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि हमारे देश में खुले में शौच करने वाले लोगों की संख्या लगभग 90 करोड़ के आसपास है ।

लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया है जिसका असर भी देखने को मिल रहा है । ग्रामीण इलाकों में 9 करोड़ से भी ज्यादा शौचालय बनाए जा चुके हैं ।

सरकार की हमेशा यही कोशिश रही है कि साल 2019 में भारत के और भी ग्रामीण क्षेत्र में शौचालय का निर्माण हो सके और भारत खुले में शौच से मुक्त हो सके ।

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